प्रथम रश्मि
सुमित्रानंदन पंत
प्रथम रश्मि का आना रंगिणि!
तूने कैसे पहचाना?
कहाँ, कहाँ हे बाल-विहंगिनि !
पाया तूने वह गाना?
सोयी थी तू स्वप्न नीड़ में,
पंखों के सुख में छिपकर,
ऊँघ रहे थे, घूम द्वार पर,
प्रहरी-से जुगनू नाना।
शशि-किरणों से उतर-उतरकर,
भू पर कामरूप नभ-चर,
चूम नवल कलियों का मृदु-मुख,
सिखा रहे थे मुसकाना।
स्नेह-हीन तारों के दीपक,
श्वास-शून्य थे तरु के पात,
विचर रहे थे स्वप्न अवनि में
तम ने था मंडप ताना।
कूक उठी सहसा तरु-वासिनि !
गा तू स्वागत का गाना,
किसने तुझको अंतर्यामिनि !
बतलाया उसका आना !
“प्रथम रश्मि” कविता का सारांश :-
सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित “प्रथम रश्मि” कविता में कवि प्रकृति के सौंदर्य और सुबह के आने का मनोहारी चित्र कि व्याख्या की है। इस कविता में कवि में सुबह की पहली किरण आने से पहले और आने के बाद की प्राकृतिक सौंदर्य की व्याख्या की है। कवि पहले एक छोटी चिड़िया से प्रश्न करता है कि उस चिड़िया ने सूर्य से अपने वाली पहली किरण को कैसे पहचाना था और उस किरण का स्वागत गीत कैसे गाने लगी।
कवि के अनुसार चारों ओर रात का वातावरण था। छोटी छोटी चिड़िया अपने अपने घोंसलों में सो रही थी। जुगनी चारों ओर घूम रही थे। चंद कि शीतल किरणे किरणों को मुस्कुराना सिखा रही थी। वातावरण पूरा शांत था। पेड़ो के सारे पत्ते हवा के स्थिर होने के वजह से शांत थे और तारों की रोशनी स्नेहहीन दीप के जैसी लग रही है सबकुछ ऐसा लग रहा था मानो अंधेरे ने पूरी धरती पर अपना डेरा जमा लिया या हो।
इस शांत वातावरण में पेड़ो पर रहने वाले सभी चिड़िया अपने मधुर आवाज में गाना गाने लगे। कवि आश्चर्यचकित होकर चिड़िया से पूछता है कि उसे कैसे पता चला कि सूर्य की पहली किरण आने वाली है। कवि चिड़िया को ‘ अंतर्यामिनी ‘ कहते है क्योंकि चिड़िया बिना किसी संकेत के ही प्रकृति के परिवर्तन को महसूस कर लेती है। वास्तव में चिड़िया का गीत नए प्रभात और नए जीवन के आगमन का स्वागत करता है। चिड़िया का गीत नए प्रभात और नए जीवन का स्वागत गीत है।
“प्रथम रश्मि” कविता में कवि ने प्रकृति के कोमल और सुंदर रूप का वर्णन किया है। पंत जी प्रकृति के महान लेखक माने जाते है और इस कविता ने उनका प्रकृति प्रेम स्पष्ट दिखाई दे रहा है। यह कविता ये संदेश देती है की प्रकृति की प्रत्येक वस्तु जीव जंतु या मनुष्यों से अधिक आवेदनशील होते है और वे आने वाले परिवर्तनों को पहले ही भाप लेते है।
“प्रथम रश्मि” कविता का विशेष:
कविता की भाषा अत्यंत सरल मधुर और चित्रात्मक है। इस कविता में अनुप्रास और मानवीकरण अलंकारों का प्रयोग किया गया है। यह पूरी कविता संगीतात्मक और सौंदर्य से भरी हुई है जिससे पाठक के मन में प्रातः का दृश्य सजीव हो उठता है। इस प्रकार “प्राथम रश्मि” कविता प्रकृति की सुंदरता, नवजीवन और आशा का सुंदर संदेश देती है।
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