धूप का टुकड़ा सुमित्रा नंदन पंत एक धूप का हँसमुख टुकड़ा तरु के हरे झरोखे से झर अलसाया है धरा धूल पर चिड़िया के सफ़ेद बच्चे सा! उसे प्यार है भू-रज से लेटा है चुपके ! वह उड़ कर किरणों के रोमिल पंख खोल तरु…

Read More

कविता

हिन्दी साहित्य

गहन है या अंधकार सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला गहन है यह अंधकारा; स्वार्थ के अवगुंठनों से हुआ है लुंठन हमारा। खड़ी है दीवार जड़…

Read More

देवी-देवता

पौराणिक कथाएँ