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गहन है या अंधकार सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला गहन है यह अंधकारा; स्वार्थ के अवगुंठनों से हुआ है लुंठन हमारा। …

खद्योत अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध प्रकृति-चित्र-पट असित-भूत था छिति पर छाया था तमतोम । भाद्र-मास की अमा-निशा थी जलदजाल पूरित था…