- धूप का टुकड़ा (सुमित्रा नंदन पंत)
- संध्या सुंदरी (सूर्यकांत त्रिपाठी निराला)
- जागो फिर एक बार २ (सूर्यकांत त्रिपाठी निराला)
- गहन है या अंधकार (सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला)
- एक तिनका (अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध)
- पानी की प्रार्थना (केदारनाथ सिंह)
- विद्यापति (भक्त कवि या श्रृंगारी कवि)
- गा की वर्षा पावक कण (सुमित्रानंदन पंथ)
Browsing: हिंदी कविता
धूप का टुकड़ा सुमित्रा नंदन पंत एक धूप का हँसमुख टुकड़ा तरु के हरे झरोखे से झर अलसाया है धरा…
संध्या सुंदरी सूर्यकांत त्रिपाठी निराला दिवसावसान का समय मेघमय आसमान से उतर रही है वह संध्या-सुंदरी परी-सी धीरे धीरे…
जागो फिर एक बार २ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जागो फिर एक बार ! प्यार जगाते हुए हारे सब तारे…
गहन है या अंधकार सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला गहन है यह अंधकारा; स्वार्थ के अवगुंठनों से हुआ है लुंठन हमारा। …
एक तिनका अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध मैं घमण्डों में भरा ऐंठा हुआ । एक दिन जब था मुण्डेरे पर खड़ा ।…
पानी की प्रार्थना केदारनाथ सिंह प्रभु, मैं – पानी – पृथ्वी का प्राचीनतम नागरिक आपसे कुछ कहने की अनुमति चाहता…
गा की वर्षा पावक कण सुमित्रानंदन पंथ गा, कोकिल, बरसा पावक-कण! नष्ट-भ्रष्ट हो जीर्ण-पुरातन, ध्वंस-भ्रंस जग के जड़ बन्धन !…
खद्योत अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध प्रकृति-चित्र-पट असित-भूत था छिति पर छाया था तमतोम । भाद्र-मास की अमा-निशा थी जलदजाल पूरित था…
स्नेह निझिर बह गया है सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” स्नेह-निर्झर बह गया है ! रेत ज्यों तन रह गया है…
बादल सुमित्रानंदन पंत सुरपति के हम हैं अनुचर, जगत्प्राण के भी सहचर मेघदूत की सजल कल्पना, चातक के चिर…
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