खद्योत
अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध
प्रकृति-चित्र-पट असित-भूत था
छिति पर छाया था तमतोम ।
भाद्र-मास की अमा-निशा थी
जलदजाल पूरित था व्योम।
काल-कालिमा-कवलित रवि था
कलाहीन था कलित मयंक ।
परम तिरोहित तारक-चय था,
था कज्जलित ककुभ का अंक । 1।
दामिनि छिपी निविड़ घन में थी
अटल राज्य तम का अवलोक।
था निशीथ का समय, अवनितल
का निर्वापित था आलोक।
ऐसे कुसमय में तम-वारिधि
मज्जित भूत निचय का पोत।
होता कौन न होता जग में
यदि यह तुच्छ कीट खद्योत ।2।
‘खद्योत’ कविता का सारांश:-
‘खद्योत’ कविता में कवि ने घने अंधकार से भरी अमावस की रात का अत्यंत जीवंत चित्रण किया है। ‘खद्योत’ कविता में प्रकृति का भयंकर और गंभीर रूप देखने देता है। कवि बताते है कि भाद्र मास की अमावस की रात थी। चारों ओर गहन अंधकार फैला हुआ था। आकाश घने बादलों से ढका हुआ था और पृथ्वी पर अंधकार का पसरा हुआ था। सूर्य डूब चुका था तथा चंद्रमा भी अनुपस्थित था। तारों का प्रकाश भी दिख नहीं रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा वातावरण काजल से ढक गया हो।
कवि आगे कहता है कि बिजली भी घने बादलों में छिप गई थी और रात के समय धरती पर कहीं भी प्रकाश का एक कण दिखाई नहीं देता था। चारों ओर भय, मातम और हताराशा का वातावरण था। ऐसा लग रहा था मानो संसार अंधकार के महासागर में डूब गया हो। इस भयावह परिस्थिति में केवल एक छोटा-सा कीट ‘खद्योत’ अर्थात जुगनू प्रकाश का पुंज लिए चारों ओर प्रकाश फैलाता दिखाई देता है। उसका छोटा-सा प्रकाश भी अंधकार में आशा और जीवन का संदेश देता है।
कवि ने जुगनू के माध्यम से यह प्रेरणा दी है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन और अंधकारमय क्यों न हों, मनुष्य को कभी निराश नहीं होना चाहिए। छोटा-सा प्रयास भी बड़े से बड़े अंधेरे को चुनौती दे सकता है। जुगनू का छोटा प्रकाश साहस, आशा और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया है। कविता में यह संदेश दिया गया है कि संसार में किसी का भी अस्तित्व व्यर्थ का नहीं होता। प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार समाज और जीवन में प्रकाश फैला सकता है।
कविता की विशेषताएँ:
इस कविता की भाषा अत्यंत संस्कृतनिष्ठ, प्रभावशाली और चित्रात्मक है। कवि ने प्रकृति के अंधकारमय चित्र का बहुत सुंदर वर्णन किया है। अनुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग कविता की शोभा बढ़ाता है, जैसे — “तमतोम”, “काल-कालिमा-कवलित” आदि। कविता में प्रकृतिक-चित्रण के साथ ही साथ गहरी दार्शनिक भावना भी व्यक्त की गई है। ‘खद्योत’ अर्थात जुगनू को आशा और संघर्ष का प्रतीक बनाकर कवि ने जीवन में आत्मविश्वास बनाए रखने का संदेश दिया है। यह कविता पाठकों को विपरीत परिस्थितियों में भी आशा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
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