ध्वनि
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
अभी न होगा मेरा अन्त
अभी-अभी ही तो आया है
मेरे वन में मृदुल वसन्त-
अभी न होगा मेरा अन्त
हरे-हरे ये पात,
डालियाँ, कलियाँ कोमल गात !
मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर
फेरूँगा निद्रित कलियों पर
जगा एक प्रत्यूष मनोहर
पुष्प-पुष्प से तन्द्रालस लालसा खींच लूँगा मैं,
अपने नवजीवन का अमृत सहर्ष सींच दूँगा मैं,
द्वार दिखा दूँगा फिर उनको
है मेरे वे जहाँ अनन्त-
अभी न होगा मेरा अन्त।
मेरे जीवन का यह है जब प्रथम चरण,
इसमें कहाँ मृत्यु?
है जीवन ही जीवन
अभी पड़ा है आगे सारा यौवन
स्वर्ण-किरण कल्लोलों पर बहता रे, बालक-मन,
मेरे ही अविकसित राग से
विकसित होगा बन्धु, दिगन्त;
अभी न होगा मेरा अन्त।
“ध्वनि” कविता का सारांश :-
“ध्वनि” कविता सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा लिखित कविता है। इस कविता में कवि ने जीवन के प्रति अटूट विश्वास, आशा, उत्साह और संघर्षशीलता की भावना को उजागर किया है। ध्वनि कविता निराशा को छोड़ कर आत्मविश्वास का संदेश देती है। कवि कहते है कि उनका मानना है कि अभी उनका जीवन समाप्त नहीं होगा क्योंकि अभी उनके जीवन में वसंत का आगमन हुआ है। यहां वसंत नई उम्मीदों, नवजीवन और नई संभावनाओं का प्रतीक है। वसंत के आने से कवि अपने अंदर नई ऊर्जा और उत्साह का अनुभव करता है इसलिए कवि कहता है कि उसका अंत अभी नहीं होगा।
कवि प्रकृति के अदभुत दृश्यों के माध्यम से अपनी भावनाओं को प्रकट करते है। कवि हरे भरे पत्तों, पेड़ो के डालियों और खिलने वाले फूलों की व्याख्या करते है। यह सभी चीजे जीवन में ताजगी और विकास का संकेत देता है। कवि खुदको उस माली की तरह देखता है जो अपने कोमल भावनाओं से सोई हुई कलियों को जगाएगा और उन कलियों को खिलने का मौका देगा। कवि अपने नए जीवन के अमृत से संसार को सींचना चाहते है। इस बात का यह अर्थ है कि कवि आपनी रचनात्मक शक्ति, प्रेम और प्रेरणा के द्वारा संसार के नई चेतना फैलाना चाहते है।
कवि को इस चीज का विश्वास था कि यह उनके जीवन का प्रारंभिक चरण है। अभी कवि के सामने पूरा यौवन और कैमक्षेत्र पड़ा हुआ है। इसलिए कवि के मन में मृत्यु का विचार नहीं आता है। कवि जीवन को उस शक्ति के रूप में देखता है जी जीवन में निरंतर आगे बढ़ता रहता है। कवि का “बालक मन” स्वर्णिम किरणों की लहरों पर बह रहा है। यह बालक मन का अर्थ है निष्पष्टता, उत्सुकता और नवीन काल्पनिक शक्ति है। कवि अपने अविकसित और अधूरी रागों और भावनाओं को पूरा होते हुए देखता है। कवि को यह विश्वास है कि कवि की सृजनात्मक शक्ति आगे चलकर पूरे संसार को प्रभावित करेगी।
कवि इस कविता में आत्मविश्वास, कर्मशीलता और आशावाद का संदेश देते है। कवि जीवन के किसी भी परिस्थिति से हार न मानने और निरंतर प्रयास करते रहने की प्रेरणा देते है। कवि यह कहते है कि जब की जब किसी मनुष्य के अंदर उत्साह, आशा और कुछ नया करने की इच्छा होती है तब उसको जीवन का अंत नहीं होता है। निरंतर विकास और सृजन ही जीवन है। इस प्रकार “ध्वनि” कविता मानव जीवन में आशा, संघर्ष और सकारात्मकता को प्रस्तुत करता है।
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