प्राकृतिक सौंदर्य
श्रीधर पाठक
ध्यान लगाकर जो तुम देखो, इस जग की सुघड़ाई को।
बात-बात में पाओगे तुम, ईश्वर की चतुराई को ।।
ये सब भाँति-भाँति के पक्षी, ये सब रंग-रंग के फूल।
यह वन की लहलही लता, नव ललित-ललित शोभा की मूल ।।
ये नदियाँ, ये झील सरोवर, कमलों पर भौरों की गूंज।
बड़े सुरीले बोलों से ये, गूँज रही बेलों की कुंज ।।
ये पर्वत की रम्य शिखाएँ, शोभा-सहित चढ़ाव-उतार।
निर्मल जल के झरते झरने, सीमा रहित महा-विस्तार ।।
छः प्रकार की ऋतु का आना, नित नवीन शोभा के संग।
पाकर समय वनस्पति फलना, रूप बदलता रंग-बिरंग ।।
सूर्य-चंद्र की शोभा अद्भुत, बारी से आना दिन-रात ।
ज्यों अनंत तारामंडल से, सज जाता रजनी का गात ।।
यह समुद्र का पृथ्वी तल पर, छाया जो जलमय विस्तार।
उसमें से मेघों के मंडल, हों अनंत उत्पन्न अपार ।।
गर्जन-तर्जन घन मंडल का, वर्षा-बिजली का संचार।
इसमें दीखे परमेश्वर की, लीला अद्भुत अपरंपार ।।

भावार्थ:-
प्राकृतिक सौंदर्य कविता श्रीधर पाठक जी द्वारा लिखित कविता है। इस कविता में श्रीधर पाठक जी ने प्रकृति की सुंदरता और ईश्वर की अद्भुत रचना का सुंदर वर्णन किया है। प्राकृतिक सौंदर्य कविता में कवि यह मानते है कि यही मनुष्य हर चीज को ध्यान से देखे तो उसे प्रकृति की हर चीज में ईश्वर की अद्भुत रचना और बुद्धिमत्ता दिखाई देगी। प्रकृति का सम्पूर्ण दृश्य ईश्वर की महान रचना का प्रमाण देता है। प्राकृतिक सौंदर्य कविता में कवि सबसे पहले विभिन्न प्रकार के फूलों , पक्षियों और हरि भरी लताओं का वर्णन किया है। यह सब मिलकर प्रकृति को और अधिक मन मोहक बनाते है।
वन में फैली पेड़ो और पौधों की हरियाली प्रकृति की शोभा को और अधिक बढ़ता है। तत्पश्चात कवि नदियों, झीलों और सरोवरों की व्याख्या करते है, जहां कमलों पर भैरो की गूंज सुनाई पड़ती है। कुंजो की ध्वनि वातावरण को संगीतपूर्ण करती है।
प्राकृतिक सौंदर्य कविता में कवि पर्वतो की चोटियों, उतर चढ़ाव तथा निर्मल जल के झरनों की व्याख्या करते है। प्राकृति का यह विस्तार मनुष्य को चकित कर देता है। आगे बढ़ते हुए कवि ऋतुओं के बदलने की बात कहते है। वह कहते है कि प्रत्येक ऋतु अपने साथ नई सुंदरता ले कर आता है और समय के साथ पेड़ पौधों फलते फूलते है और प्रकृति आने रंगों में परिवर्तित होती रहती है।
प्राकृतिक सौंदर्य कविता में कवि सूर्य और चंद्रमा के शोभा का भी वर्णन करते है। बदली का गरजना, बिजली का चमकना और वर्षा का होना ईश्वर की अद्भुत रचना को दर्शाता है। दिन रात का होना, रात के समय तारों का चमकना प्रकृति की अद्भुत गुण है। इसके बाद कवि के समुद्र की विशालता और उसके द्वारा बनने वाले बदलो का वर्णन किया है।
इस प्रकार प्राकृतिक सौंदर्य कविता में कवि ने प्रकृति के विभिन्न रूपों का वर्णन किया है और ईश्वर के इस अद्भुत अचना का प्राशंसा किया है।
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