फूल और कांटा
अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध
हैं जन्म लेते जगह में एक ही,
एक ही पौधा उन्हें है पालता
रात में उन पर चमकता चाँद भी,
एक ही सी चाँदनी है डालता।
मेह उन पर है बरसता एक सा,
एक सी उन पर हवाएँ हैं बही
पर सदा ही यह दिखाता है हमें,
ढंग उनके एक से होते नहीं।
छेदकर काँटा किसी की उंगलियाँ,
फाड़ देता है किसी का वर वसन
प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर,
भँवर का है भेद देता श्याम तन ।
फूल लेकर तितलियों को गोद में
भँवर को अपना अनूठा रस पिला,
निज सुगन्धों और निराले ढंग से
है सदा देता कली का जी खिला।
है खटकता एक सबकी आँख में
दूसरा है सोहता सुर शीश पर,
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।
“फूल और कांटा” कविता का सारांश :-
‘फूल और कांटा’ की रचना अयोध्यसिंह उपाध्याय ‘ हरिऔध द्वारा किया गया है। “फूल और कांटा” कविता में कवि ने फूल और काँटे के माध्यम से मनुष्य के स्वभाव और कर्मों का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया है। कवि बताता है कि फूल और कांटा दोनों एक ही पौधे में विद्यमान होते है और एक ही वातावरण में फलते- फूलते हैं। दोनों पर चंद्रमा की चांदनी समान रूप से पड़ती है, दोनों को समान रूप से वर्षा और हवा मिलती है। अर्थात दोनों को समान परिस्थितियाँ प्राप्त होती हैं किंतु फिर भी उनके स्वभाव और कार्य में अंतर होते हैं।
काँटा हमेशा दूसरों को कष्ट देने का कार्य करता है। वह किसी के हाथों में चुभ कर उसे अत्यंत पीड़ा देता है, वस्त्र में फंस कर उसे फाड़ देता है तथा तितलियों और भँवरों को भी चित पहुंचता है। इसके विपरीत फूल सबको सुगंध और आनंद देता है। वह अपनी सुगंध से वातावरण को सुगंधित कर देता है। तितलियाँ और भँवरे उसके पास आकर प्रसन्न होते हैं। फूल अपनी सुंदरता और मधुरता से सबका मन मोह लेता है।
कवि अंत में यह संदेश देता है कि केवल ऊँचे कुल या अच्छे वातावरण में जन्म लेने से कोई महान नहीं बन जाता। महानता व्यक्ति के अंदर निहित गुणों, व्यवहार तथा आचरण और कर्मों से सिद्ध होती है। जो दूसरों को सुख देता है, वही सम्मान प्राप्त करने के योग्य होता है; जबकि दूसरों को कष्ट देने वाला व्यक्ति सबकी आँखों में खटकता है।
कविता की विशेष:
1. प्रेरणादायक संदेश: कविता “फूल और कांटा” के माध्यम से कवि ने अच्छा कर्म और अच्छे स्वभाव को अपनाने की प्रेरणा दी है।
2. प्रतीकात्मक शैली: फूल को अच्छे और सज्जन व्यक्ति के रूम में, जो सबको सुख तथा आनंद देते है तथा काँटे को कठोर और दुष्ट व्यक्ति के रूप में जो सब को कष्ट एवं दुःख देते है, के रूप में प्रकट किया गया है।
3. सरल एवं प्रभावशाली भाषा: कविता की भाषा अत्यंत सरल एवं पाठकों के लिए सुबोध है।
4. प्रकृति-चित्रण: कवि ने फूल, काँटे, तितली, भँवरे आदि का उदाहरण दे कर इन सब को जीवंत रूम में कविता में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
5. नैतिक शिक्षा: कविता सिखाती है कि महानता ऊंचे कुल जन्म से नहीं, बल्कि अच्छे कर्म और अच्छे व्यवहार से मिलती है।
6. अलंकारों का प्रयोग: कविता में अनुप्रास तथा मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किया गया है।
7. तुलनात्मक शैली: फूल और काँटे के गुणों की एक दूसरे से तुलना करके कवि ने अपना संदेश को स्पष्ट करने का प्रयत्न किया है।
8. भावप्रधान कविता: कविता में संवेदना, मधुरता और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
अयोध्यसिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ जी द्वारा लिखित कविता “फूल और कांटा” जैसी और कविताओं को पढ़ने के लिए हमारे स्पेशल कैटेगरी अयोध्यसिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ को देखे। अगर आप हमारे द्वारा लिखे गए इस तरह के आर्टिकल्स में सहयोग देना चाहते है तो हमारे व्हाट्सएप चैनल को ज्वाइन कर के हमारे साथ जुड़िए। किसी भी प्रकार के सहयोग, प्रश्न अथवा सुझाव के लिए हमारे साथ व्हाट्सएप चैनल के माध्यम से हमसे जुड़े। धन्यवाद!
