वृक्ष
रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(१)
पहली पंक्ति लिखी विधि ने जिस दिन कविता की,
उस दिन पहला वृक्ष स्वयं उत्पन्न हो गया।
प्रथम काव्य है वृक्ष विश्व के पहले कवि का।

(२)
दुमों को प्यार करता हूँ।
प्रकृति के पुत्र ये
bमां पर सभी कुछ छोड़ देते हैं,
न अपनी ओर से कुछ भी कभी कहते।
प्रकृति जिस भांति रखना चाहती उस भांति ये रहते।

भावार्थ:-
वृक्ष कविता रामधारी सिंह दिनकर जी द्वारा लिखित कविता है। इस कविता के माध्यम से रामधारी सिंह दिनकर जी ने वृक्षो के महत्व और उनके सरलता तथा त्यागपूर्ण स्वभाव अत्यंत सुंदर और प्रभावी ढंग से व्याख्या किया है। कविता के प्रारंभ में कवि कहते है कि इस संसार पहला पेड़ तब उत्पन्न हुआ जब इस सृष्टि के रचयिता ने पहली बार कविता की पंक्तियों को लिखा। इस प्रकार कवि ये बताना चाहते है कि वृक्ष प्रकृति की सबसे प्राचीन ओर खूबसूरत रचना है। पेड़ पवित्र सुंदर और जीवनदायी है। पेड़ प्रकृति की शोभा बढ़ने के साथ साथ जीवो को जीवन भी प्रदान करती है।
इस कविता के दूसरे भाग ने कवि पेड़ के विनम्र और संतोषी स्वभाव की व्याख्या करते है। वो कहते है कि पेड़ अपने माँ अर्थात प्रकृति के ऊपर सब छोड़ देते है इसलिए वे प्रकृति के सच्चे पुत्र है।
इस कविता रामधारी सिंह दिनकर जी द्वारा लिखित कविता है। इस कविता के माध्यम से रामधारी सिंह दिनकर जी ने वृक्षो के महत्व और उनके सरलता तथा त्यागपूर्ण स्वभाव अत्यंत सुंदर और प्रभावी ढंग से व्याख्या किया है। कविता के प्रारंभ में कवि कहते है कि इस संसार पहला पेड़ तब उत्पन्न हुआ जब इस सृष्टि के रचयिता ने पहली बार कविता की पंक्तियों को लिखा। इस प्रकार कवि ये बताना चाहते है कि पेड़ प्रकृति की सबसे प्राचीन ओर खूबसूरत रचना है। पेड़ पवित्र सुंदर और जीवनदायी है। पेड़ प्रकृति की शोभा बढ़ने के साथ साथ जीवो को जीवन भी प्रदान करती है।
इस कविता के दूसरे भाग ने कवि वृक्ष के विनम्र और संतोषी स्वभाव की व्याख्या करते है। वो कहते है कि पेड़ अपने माँ अर्थात प्रकृति के ऊपर सब छोड़ देते है इसलिए वे प्रकृति के सच्चे पुत्र है। पेड़ कभी अपनी इच्छाए प्रकट नहीं करते न ही कभी शिकायत करते है। जिस परिस्थिति में प्रकृति उन्हें रखती है वे उसी परिस्थिति में संतोषपूर्ण जीवन व्यतीत करते है। धूप, वर्षा, आंधी, तूफान, ठंड सभी परिस्थित को वे शांत ढंग से व्यतीत करते है।
कवि के अनुसार मनुष्य को भी पेड़ों से सुख और प्रेरणा लेनी चाहिए। हमे भी सरलता, सहनशीलता, संतोष, और त्याग का गुण अपनाना चाहिए। पेड़ दूसरों की सेवा करते है वे फल, फुल, छाया आदि प्रदान कर दूसरे जीवो का कल्याण करते हैं। इस प्रकार यह कविता वृक्षों के महत्व और उसके आत्म बलिदान की व्याख्या करती हैं।
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