धूप का टुकड़ा
सुमित्रा नंदन पंत
एक धूप का हँसमुख टुकड़ा
तरु के हरे झरोखे से झर
अलसाया है धरा धूल पर
चिड़िया के सफ़ेद बच्चे सा!
उसे प्यार है भू-रज
से लेटा है चुपके !
वह उड़ कर
किरणों के रोमिल पंख खोल
तरु पर चढ़
ओझल हो सकता फिर अमित नील में!
लोग समझते
मैं उसको व्यक्तित्व दे रहा
कला स्पर्श से !
मुझको लगता
वही कला को देता निज व्यक्तित्व
स्वयं व्यक्तिवान्
ज्योतिर्मय जो !
भूरज में लिपटा
श्री शुभ्र धूप का टुकड़ा
वह रे स्वयंप्रकाश
अखंड प्रकाशवान !
“धूप का टुकड़ा” कविता का सारांश:-
धूप का टुकड़ा कविता सुमित्रा नंदन पंत द्वारा रचित कविता है। यह कविता प्राकृतिक सौंदर्य एवं कवि की संवेदनशीलता को दर्शाता है। कवि एक छोटी से धूप के टुकड़े का मानवीकरण कविता मै करते है।
कवि कहते है के पेड़ो की हरी पत्तियों के बीच की सुराखों से छनकर आया हुआ धूप का टुकड़ा धरती की धूल पर इस प्रकार पड़ा है, मानो किसी सफेद पंछी का बच्चा थककर धूल पर विश्राम कर रहा हो। ऐसा प्रतीत होता है मानो वह छोटा सा धूप का टुकड़ा धरती से प्रेम कर रहा हो और चुप चाप वही लेटा हो।
कवि आगे की पंक्ति में कहते है कि यदि वह चाहे तो पुनः अपने कोमल पंख फैलाकर पेड़ पर चढ़ सकता है और नीले आकाश में विलीन हो सकता है। सामान्यतः पाठक ये सोचा है कि कवि अपनी संवेदनशीलता तथा कल्पना शक्ति से किसी धूप के छोटे से टुकड़े को मानव रुप प्रदान कर रहे हो, परन्तु कवि के अनुसार वास्तविकता इससे बिल्कुल भिन्न है। धूप का वह छोटा सा टुकड़ा स्वयं इतना जीवंत, सुंदर एवं वैयक्तिक है कि वो स्वयं कवि की कला को व्यक्तित्व प्रदान कर रहा है।
अंततः कवि कहते है कि धरती की धूल में लिपटा ये उज्ज्वल धूप का टुकड़ा वास्तव में स्वयं प्रकाशमान है। वह अखंड प्रकाश का पुंज है एवं अपने अंदर दिव्यता तथा सौंदर्य को समेटे हुए है।
सुमित्रा नंदन पंत द्वारा रचित कविता “धूप का टुकड़ा” का विशेष:-
1. प्राकृतिक चित्रण:- इस कविता में कवि द्वारा स्पष्ट रूप से धूप के टुकड़े का मानवीकरण किया गया है। इसके अतिरिक्त धूप, धूल, आकाश, धरती तथा पेड़ आदि का सुंदर चित्रण किया गया है।
2. मानवीकरण अलंकार:- धूप के टुकड़े को किसी जीवित प्राणी की तरह प्रस्तुत किया गया है।
3. उपमा अलंकार:- धूप के टुकड़े की तुलना किसी सफेद चिड़िया के बच्चे से की गई है।
4. कल्पनाशीलता:- कविता मै प्रकाश को दिव्यता और काल्पनिक चेतना का केंद्र माना गया है।
5. सरल एवं भावपूर्ण भाषा:- कविता की भाषा सुबोध, सरल , सहज एवं मधुर है।
6. सौंदर्य बोध:- कविता में साधारण से दृश्य में भी अलौकिकता एवं दिव्यता को देखने की कवि की कल्पना शक्ति प्रकट होती है।
7. प्रतीकात्मकता:- धूप का टुकड़ा प्रकाश, चेतना एवं जीवन – ऊर्जा का प्रतीक है।
सुमित्रानंदन पंत जी द्वारा लिखित कविता “धूप का टुकड़ा“ जैसी और कविताओं को पढ़ने के लिए हमारे स्पेशल कैटेगरी सुमित्रानंदन पंत को देखे। अगर आप हमारे द्वारा लिखे गए इस तरह के आर्टिकल्स में सहयोग देना चाहते है तो हमारे व्हाट्सएप चैनल को ज्वाइन कर के हमारे साथ जुड़िए। किसी भी प्रकार के सहयोग, प्रश्न अथवा सुझाव के लिए हमारे साथ व्हाट्सएप चैनल के माध्यम से हमसे जुड़े। धन्यवाद!
