Author: Puja Gupta

मैकू (प्रेमचंद की कहानी ) कादिर और मैकू ताड़ीखाने के सामने पहुंचे; तो वहां कांग्रेस के वालंटियर झंडा लिये खड़े नजर आये। दरवाजे के इधर-उधर हजारों दर्शक खड़े थे। शाम का वक्त था। इस वक्त गली में पियक्कड़ों के सिवा और कोई न आता था। भले आदमी इधर से निकलते झिझकते। पियक्कड़ों की छोटी-छोटी टोलियां आती-जाती रहती थीं। दो – चार वेश्याएं दुकान के सामने खड़ी नजर आती थीं। आज यह भीड़ – भाड़ देखकर मैकू ने कहा – बड़ी भीड़ है बे, कोई दो – तीन सौ आदमी होंगे। कादिर ने मुस्करा कर कहा – भीड़ देख कर डर…

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