Author: Puja Gupta

झलकै अति सुन्दर आनन गौर ( पद ) कवि परिचय : घनानंद जी रीतिकाल की रीतिमुक्त काव्य धारा के प्रमुख कवि थे। इनका जन्म 1689 ई० में हुआ। जनश्रुति के अनुसार घनानंद दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह रंगीला के दरबार में मीर मुंशी थे। उनके काव्य की प्रमुख भावना ‘उन्मुक्त प्रेम’ है। यह प्रेम लौकिकता से अलौकिकता की ओर मुखरित है। वे प्रधानतः विप्रलम्भ श्रृंगार के कवि है किन्तु श्रृंगार के दोनों-संयोग और वियोग पक्ष उनके काव्य में चित्रित हुए हैं। उनकी सभी रचनाओं में ‘सुजान’ को सम्बोधित किया गया है जिसे श्रृंगार में नायक के लिए तथा भक्तिभाव में…

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हीन भए जल मीन अधीन ( घनानंद के पद ) कवि परिचय : घनानंद जी रीतिकाल की रीतिमुक्त काव्य धारा के प्रमुख कवि थे। इनका जन्म 1689 ई० में हुआ। जनश्रुति के अनुसार घनानंद दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह रंगीला के दरबार में मीर मुंशी थे। उनके काव्य की प्रमुख भावना ‘उन्मुक्त प्रेम’ है। यह प्रेम लौकिकता से अलौकिकता की ओर मुखरित है। वे प्रधानतः विप्रलम्भ श्रृंगार के कवि है किन्तु श्रृंगार के दोनों-संयोग और वियोग पक्ष उनके काव्य में चित्रित हुए हैं। उनकी सभी रचनाओं में ‘सुजान’ को सम्बोधित किया गया है जिसे श्रृंगार में नायक के लिए तथा…

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आयो घोष बड़ो व्योपारी ( पद ) जीवन परिचय :- सूरदास जी कृष्णभक्ति काव्य धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि थे। इनका जन्म सम्वत् 1540 (1483 ई०) में सीही नामक ग्राम में हुआ। कुछ विद्वान सूरदास का जन्म स्थान रूनकता मानते है। स्वामी वल्लभाचार्य जी सूरदास के गुरु थे। सूरदास वात्सल्य व श्रृंगार के अन्यतम कवि हैं। सूरदास की भक्ति के विविध रूप हैं। सख्यभाव की भक्ति, वात्सल्यभाव की भक्ति उनके भक्ति के प्रमुख रूप हैं। इन्हीं भक्ति को आधार बनाकर सूर ने अपनी बंद आँखों से वो सबको देख लिया, जो लोग खुली आँखों से भी नहीं देख पाते। आचार्य रामचन्द्र…

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किलकत कान्ह घुटुरुवनि आवत ( पद ) जीवन परिचय :- सूरदास जी कृष्णभक्ति काव्य धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि थे। इनका जन्म सम्वत् 1540 (1483 ई०) में सीही नामक ग्राम में हुआ। कुछ विद्वान सूरदास का जन्म स्थान रूनकता मानते है। स्वामी वल्लभाचार्य जी सूरदास के गुरु थे। सूरदास वात्सल्य व श्रृंगार के अन्यतम कवि हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ – सूर सागर, सूर सारावली, साहित्य लहरी हैं। सूरदास ने अपने काव्य में बालकृष्ण के सौन्दर्य, चपल चेष्टाओं और क्रीड़ाओं की मनोरम झाँकी के साथ ही कृष्ण व गोपियों के अनन्य प्रेम का सरस, सजीव व मनोहारी चित्रण किया है। सूरदास जी…

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दो भाई लेखक परिचय:- मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई १८८०, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।उनका असली नाम गणपत राय श्रीवास्तव है। उनको उपन्यास ‘सम्राट’ तथा ‘कलम का समर्थक कहा जाता था। उन्होंने अपने काव्यों (गोदान, गबन, ईदगाह, सेवासदन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि, कफन, आदि) द्वारा समाज में बहुत से शोषित वर्ग के लिए आवाज उठाई। उपन्यासों के साथ साथ उन्होंने पत्रिकाओं के संपादन का काम भी किया। उनकी भाषा सरल, सहज, व्यावहारिक और प्रभावमयी है, जिसमें आम बोल चल के साथ उर्दू, फारसी और देशज शब्दों का मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी मृत्यु 8 अक्टुबर, 1936…

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जसोदा हरि पालनैं झुलावै जीवन परिचय :- सूरदास जी कृष्णभक्ति काव्य धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि थे। इनका जन्म सम्वत् 1540 (1483 ई०) में सीही नामक ग्राम में हुआ। कुछ विद्वान सूरदास का जन्म स्थान रूनकता मानते है। स्वामी वल्लभाचार्य जी सूरदास के गुरु थे। सूरदास वात्सल्य व श्रृंगार के अन्यतम कवि हैं। सूरदास की भक्ति के विविध रूप हैं। सख्यभाव की भक्ति, वात्सल्यभाव की भक्ति उनके भक्ति के प्रमुख रूप हैं। इन्हीं भक्ति को आधार बनाकर सूर ने अपनी बंद आँखों से वो सबको देख लिया, जो लोग खुली आँखों से भी नहीं देख पाते। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने ठीक…

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खेलत में को काकौ गुसैयाँ (सूरदास के पद) जीवन परिचय :- सूरदास जी का जन्म १४७८ को बैशाख शुक्ल पंचमी को हुई थी। उनकंजन्म दिल्ली के पास सीधी ग्राम न मथुरा आगरा मार्ग पर स्थित रुनक्ता (मतभेद है)। उनके पिता रामदास सारस्वत और उनके गुरु का नाम महाप्रभु वल्लभाचार्य है। वे सगुण भक्ति मार्ग के कवि है। उन्होंने ने अपने काव्यों में श्री कृष्ण के बल रूप का और गोपी – प्रेम का वर्णन किया है। उनकी भाषा ब्रज है। उनको ‘अंध कवि’ कहा जाता है। उनकी प्रमुख रचनाएं सूरसागर, साहित्य लहरी, सुरसरावली है। इनकी प्रमुख रचनाएँ – सूर सागर,…

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परीक्षा-2 लेखक परिचय:- मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई १८८०, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।उनका असली नाम गणपत राय श्रीवास्तव है। उनको उपन्यास ‘सम्राट’ तथा ‘कलम का समर्थक कहा जाता था। उन्होंने अपने काव्यों (गोदान, गबन, ईदगाह, सेवासदन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि, कफन, आदि) द्वारा समाज में बहुत से शोषित वर्ग के लिए आवाज उठाई। उपन्यासों के साथ साथ उन्होंने पत्रिकाओं के संपादन का काम भी किया। उनकी भाषा सरल, सहज, व्यावहारिक और प्रभावमयी है, जिसमें आम बोल चल के साथ उर्दू, फारसी और देशज शब्दों का मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी मृत्यु 8 अक्टुबर, 1936 को…

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परीक्षा – 1 लेखक परिचय:- मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई १८८०, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।उनका असली नाम गणपत राय श्रीवास्तव है। उनको उपन्यास ‘सम्राट’ तथा ‘कलम का समर्थक कहा जाता था। उन्होंने अपने काव्यों (गोदान, गबन, ईदगाह, सेवासदन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि, कफन, आदि) द्वारा समाज में बहुत से शोषित वर्ग के लिए आवाज उठाई। उपन्यासों के साथ साथ उन्होंने पत्रिकाओं के संपादन का काम भी किया। उनकी भाषा सरल, सहज, व्यावहारिक और प्रभावमयी है, जिसमें आम बोल चल के साथ उर्दू, फारसी और देशज शब्दों का मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी मृत्यु 8 अक्टुबर,…

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अविगत गति कछु कहत न आवै जीवन परिचय :- सूरदास जी कृष्णभक्ति काव्य धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि थे। इनका जन्म सम्वत् 1540 (1483 ई०) में सीही नामक ग्राम में हुआ। कुछ विद्वान सूरदास का जन्म स्थान रूनकता मानते है। स्वामी वल्लभाचार्य जी सूरदास के गुरु थे। सूरदास वात्सल्य व श्रृंगार के अन्यतम कवि हैं। सूरदास की भक्ति के विविध रूप हैं। सख्यभाव की भक्ति, वात्सल्यभाव की भक्ति उनके भक्ति के प्रमुख रूप हैं। इन्हीं भक्ति को आधार बनाकर सूर ने अपनी बंद आँखों से वो सबको देख लिया, जो लोग खुली आँखों से भी नहीं देख पाते। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल…

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