Author: Puja Gupta

पूस की रात हल्कू ने आकर स्त्री से कहा – सहना आया है, लाओ, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूं, किसी तरह गला तो छूटे। मुन्नी झाड़ लगा रही थी। थी। पीछे फिरकर बोली – तीन ही तो तो रुपये हैं; दे दोगे तो कम्मल कहां से आवेगा? माघ – पूस की रात हार में कैसे कटेगी। उससे कह दो, फसल पर रुपये दे देंगे। अभी नहीं। हल्कू एक क्षण अनिश्चित दशा में खड़ा रहा। पूस सिर पर आ गया, कम्मल के बिना पूस की रात को वह किसी तरह नहीं सो सकता। मगर सहना मानेगा नहीं, घुड़कियां जमावेगा,…

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मै नर्क से बोल रहा हूँ हे पत्थर पूजनेवालों ! तुम्हें जिन्दा आदमी की बात सुनने का अभ्यास नहीं; इसलिए मैं मरकर बोल रहा हूँ। जीवित अवस्था में तुम जिसकी ओर आँख उठाकर नहीं देखते उसकी सड़ी लाश के पीछे जुलूस बनाकर चलते हो। जिन्दगी – भर तुम जिससे नफरत करते रहे उसकी कब्र पर चिराग जलाने जाते हो। मरते वक्त तक जिसे तुमने चुल्लू – भर पानी नहीं दिया, उसकी हाड़ गंगाजी ले जाते हो। अरे, तुम जीवन का तिरस्कार और मरण का सत्कार करते हो। इसीलिए मैं मरकर बोल रहा हूँ। मैं नर्क से बोल रहा हूँ। मगर…

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फेर-बदल लेखक परिचय :- मोहनदास करमचंद गांधी (जन्म-2 अक्टूबर, 1869-मृत्यु 30 जनवरी, 1948) को पूरी दुनिया ‘महात्मा गांधी’ अथवा ‘बापू’ के नाम से जानती है। उनका जन्म गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। इनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था। गांधी जी ने ‘सत्य के प्रयोग’ नामक आत्मकथा मूल रूप से अपनी मातृभाषा गुजराती में लिखी थी। इस पुस्तक में गांधी जी ने अपने बचपन से लेकर सन 1921 तक की घटनाओं का वर्णन किया है। गांधी जी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। कहानी :- फेर-बदल विलायती…

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भाई – बहन लेखक परिचय:- बंग महिला साहित्य की प्रारंभिक महिला लेखिकाओं में से एक थीं। उनका वास्तविक नाम ‘स्वर्ण कुमारी देवी’ मन जाता है। उनका जन्म 19वी शताब्दी को बंगाल में हुआ था। वो प्रसिद्ध कवि रवींद्रनाथ ठाकुर की बहन थी। उन्होंने हिंदी और बंगाली दोनों में अनेकों रचनाएं लिखी। वो हिंदी में ‘बंग महिला के उपनाम से लिखा करती थी। उनके काव्यों में समझ कल्याण, नारी शिक्षा और महिलाओं की स्थिति जैसे विषय प्रमुख रूप से देखने को मिलते है। बंग महिला हिंदी की पहली महिला कहानीकारो में गिनी जाती है। उनकी प्रसिद्ध रचना दिलाईवाली मनी जाती है,…

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कविता :- कठपुतली कठपुतली गुस्से से उबली  बोली – ये धोगे  क्यों है मेरे पीछे – आगे ? इन्हे तोड़ दो ; मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो। भावार्थ :- कविता की इन पंक्तियों में कवि भवानी प्रसाद मिश्र ने एक कठपुतली के मन के भावों को दर्शाया है। कठपुतली दूसरों के हाथों में बंधकर नाचने से परेशान हो गयी है और अब वो सोर धागे तोड़कर स्वतंत्र होना चाहती है। वो गुस्से में कह उठती है कि मेरे आगे – पीछे बंधे ये सभी धागे तोड़ दो और अब मुझे मेरे पैरों पर छोड़ दो। मुझे अब बंधकर नहीं…

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कविता :- छाया मत छूना लेखक परिचय :- गिरिजा कुमार माथुर का जन्म 22 अगस्त 1919 को गुना, मध्य प्रदेश में हुआ। स्वतंत्रता प्राप्त के दिनों मे हिंदी साहित्यकारों में जो उदीयमान कवि थे उनमें ‘गिरिजा कुमार माथुर’ का नाम भी सम्मिलित है। प्रारंभिक शिक्षा झाँसी, उत्तर प्रदेश में हुई और लखनऊ विश्विद्यालय से एम. ए. अग्रेजी व एल. एल. बी. की। कुछ समय तक वकालत की, उसके बाद दिल्ली में आकाशवाणी में काम किया। फिर दुरदर्शन मे भी काम किया और वहीं से सेवानिवृत हुए। 10 जनवरी 1994 को नई दिल्ली में निधन हो गया। गिरिजा कुमार माथुर की…

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मेरी जिंदगी का एक दिन 3 मार्च, 1887, मैं सात साल की होने वाली थी। इसी दिन मेरी टीचर ऐन सुलिवन मेरे घर आई। उस दोपहर, मैं अपने घर के बाहर खड़ी थी, चुपचाप । घर में हो रही हलचल से मुझे लगा, आज कुछ खास होने वाला है। तभी मुझे पास आते कदमों की आहट महसूस हुई। मैंने अपने हाथ आगे बढ़ाए। किसी ने मेरे हाथों को थामा, मुझे उठाया और गले से लगा लिया। अगली सुबह मेरी टीचर सुलिवन ने मुझे एक गुड़िया दी। मैं कुछ देर उसके साथ खेलती रही, फिर मेरे हाथ पर उन्होंने अपनी उँगली…

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अमृत संदेश ऐ भावी सुधारकों, ऐ भावी देशभक्तों ! तुमलोग हृदयवान बनो, प्रेमी बनो। क्या तुमलोग अपने प्राणों में यह अनुभव कर रहे हो कि देवताओं और ऋषियों की करोड़ों सन्तानें पशु समान हो गयी हैं ? क्या तुमलोग हृदय से यह अनुभव कर रहे हो – कोटि कोटि लोग अनाहार से मर रहे हैं, कोटि कोटि लोग शताब्दियों से आधा पेट खाकर जीवन बिता रहे हैं ? क्या तुमलोग यह सब सोचकर बेचैन हुए हो ? उस चिन्ता ने क्या तुमलोगों को पागल बना दिया है ? क्या देश की दुर्दशा की चिन्ता तुम्हारे ध्यान का एकमात्र विषय हुई…

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अकल बड़ी या भैंस लेखक परिचय:- अमृत लाल नागर जी का जन्म (17 अगस्त 1916 -23 फरवरी 1990) की हुआ था। हिंदी साहित्य के मूर्धन्य साहित्यकार, उपन्यासकार और कहानीकार थे, जिन्हें प्रेमचंद का उत्तराधिकारी माना जाता है। लखनऊ को केंद्र बना कर उन्होंने ‘ बूंद और समुद्र ‘, ‘ मानस का हंस ‘ , और ‘ खंजन नयन ‘ नम्र रचनाएं लिखी है। उन्हें 1981 में पद्मभूषण समा से सम्मानित किया गया था। जंगल में एक बहुत बड़ा तालाब था। जंगल के सभी जानवर इसी तालाब का पानी पीने आते थे। तालाब के किनारे एक पुराना पेड़ था। उसपर एक…

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सवा सेर गेंहू लेखक परिचय :- प्रेमचंद (31 जुलाई, 1880-8 अक्टूबर, 1936) हिंदी के उन महानतम लेखकों में से एक जिनके बिना हिंदी साहित्य का जगत सूना है। इनका मूल नाम ‘धनपत राय श्रीवास्तव’ था, किंतु ये ‘नवाब राय’ और ‘प्रेमचंद’ के नाम से अधिक जाने जाते हैं। हिंदी साहित्य में इन्हें ‘उपन्यास सम्राट’ की पदवी प्राप्त थी। आप एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी संपादक थे। कहानी :- सवा सिर गेहू किसी गरीब गांव में शंकर नाम का एक कुरमी किसान रहता था। सीधा-सादा, गरीब क आदमी था, अपने काम से काम, ने किसी के लेने…

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