Author: Puja Gupta

बिनु गुपाल बैरिनि भई कुंजैं ( पद ) जीवन परिचय :- सूरदास जी कृष्णभक्ति काव्य धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि थे। इनका जन्म सम्वत् 1540 (1483 ई०) में सीही नामक ग्राम में हुआ। कुछ विद्वान सूरदास का जन्म स्थान रूनकता मानते है। स्वामी वल्लभाचार्य जी सूरदास के गुरु थे। सूरदास वात्सल्य व श्रृंगार के अन्यतम कवि हैं। सूरदास की भक्ति के विविध रूप हैं। सख्यभाव की भक्ति, वात्सल्यभाव की भक्ति उनके भक्ति के प्रमुख रूप हैं। इन्हीं भक्ति को आधार बनाकर सूर ने अपनी बंद आँखों से वो सबको देख लिया, जो लोग खुली आँखों से भी नहीं देख पाते। आचार्य…

Read More

आत्माराम लेखक परिचय:- मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई १८८०, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।उनका असली नाम गणपत राय श्रीवास्तव है। उनको उपन्यास ‘सम्राट’ तथा ‘कलम का समर्थक कहा जाता था। उन्होंने अपने काव्यों (गोदान, गबन, ईदगाह, सेवासदन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि, कफन, आदि) द्वारा समाज में बहुत से शोषित वर्ग के लिए आवाज उठाई। उपन्यासों के साथ साथ उन्होंने पत्रिकाओं के संपादन का काम भी किया। उनकी भाषा सरल, सहज, व्यावहारिक और प्रभावमयी है, जिसमें आम बोल चल के साथ उर्दू, फारसी और देशज शब्दों का मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी मृत्यु 8 अक्टुबर, 1936 को…

Read More

रंगीले बाबू लेखक परिचय:- मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई १८८०, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।उनका असली नाम गणपत राय श्रीवास्तव है। उनको उपन्यास ‘सम्राट’ तथा ‘कलम का समर्थक कहा जाता था। उन्होंने अपने काव्यों (गोदान, गबन, ईदगाह, सेवासदन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि, कफन, आदि) द्वारा समाज में बहुत से शोषित वर्ग के लिए आवाज उठाई। उपन्यासों के साथ साथ उन्होंने पत्रिकाओं के संपादन का काम भी किया। उनकी भाषा सरल, सहज, व्यावहारिक और प्रभावमयी है, जिसमें आम बोल चल के साथ उर्दू, फारसी और देशज शब्दों का मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी मृत्यु 8 अक्टुबर, 1936…

Read More

रानी सारंधा लेखक परिचय:- मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई १८८०, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।उनका असली नाम गणपत राय श्रीवास्तव है। उनको उपन्यास ‘सम्राट’ तथा ‘कलम का समर्थक कहा जाता था। उन्होंने अपने काव्यों (गोदान, गबन, ईदगाह, सेवासदन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि, कफन, आदि) द्वारा समाज में बहुत से शोषित वर्ग के लिए आवाज उठाई। उपन्यासों के साथ साथ उन्होंने पत्रिकाओं के संपादन का काम भी किया। उनकी भाषा सरल, सहज, व्यावहारिक और प्रभावमयी है, जिसमें आम बोल चल के साथ उर्दू, फारसी और देशज शब्दों का मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी मृत्यु 8 अक्टुबर, 1936…

Read More

बड़े भाई साहब CLASS 10 (प्रेमचंद की कहानी) लेखक परिचय:- मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई १८८०, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।उनका असली नाम गणपत राय श्रीवास्तव है। उनको उपन्यास ‘सम्राट’ तथा ‘कलम का समर्थक कहा जाता था। उन्होंने अपने काव्यों (गोदान, गबन, ईदगाह, सेवासदन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि, कफन, आदि) द्वारा समाज में बहुत से शोषित वर्ग के लिए आवाज उठाई। उपन्यासों के साथ साथ उन्होंने पत्रिकाओं के संपादन का काम भी किया। उनकी भाषा सरल, सहज, व्यावहारिक और प्रभावमयी है, जिसमें आम बोल चल के साथ उर्दू, फारसी और देशज शब्दों का मिश्रण देखने को मिलता…

Read More

लेखक परिचय :- प्रेमचंद (31 जुलाई, 1880-8 अक्टूबर, 1936) हिंदी के उन महानतम लेखकों में से एक जिनके बिना हिंदी साहित्य का जगत सूना है। इनका मूल नाम ‘धनपत राय श्रीवास्तव’ था, किंतु ये ‘नवाब राय’ और ‘प्रेमचंद’ के नाम से अधिक जाने जाते हैं। हिंदी साहित्य में इन्हें ‘उपन्यास सम्राट’ की पदवी प्राप्त थी। आप एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी संपादक थे। रामलीला इधर एक मुद्दत से रामलीला देखने नहीं गया। बंदरों के भद्दे चेहरे लगाये, आधी टांगों का पाजामा और काले रंग का ऊंचा कुरता पहने आदमियों को दौड़ते, हू – हू करते देख…

Read More

बड़े घर की बेटी बेनीमाधव सिंह गौरीपुर गांव के जमींदार और नम्बरदार थे। उनके पितामह किसी समय बड़े धन-धान्य संपन्न थे। गांव का पक्का तालाब और मंदिर जिनकी अब मरम्मत भी मुश्किल थी, उन्हीं के कीर्ति – स्तंभ थे। कहते हैं, इस दरवाजे पर हाथी झूमता था, अब उसकी जगह एक बूढ़ी भैंस थी, जिसके शरीर में अस्थि – पंजर के सिवा और कुछ न रहा था; पर दूध शायद बहुत देती थी; क्योंकि एक न एक आदमी हांड़ी लिये उसके सिर पर सवार ही रहता था। बेनीमाधव सिंह अपनी आधी से अधिक संपत्ति वकीलों को भेंट कर चुके थे।…

Read More

होली का उपहार मैकूलाल अमरकान्त के घर शतरंज खेलने आये तो देखा, वह कहीं बाहर जाने की तैयारी कर रहे हैं। पूछा – कहीं बाहर की तैयारी कर रहे हो क्या भाई ? फुरसत हो, तो आओ, आज दो – चार बाजियां हो जायें। अमरकान्त ने सन्दूक में आईना – कंघी रखते हुए कहा – नहीं भाई, आज तो बिलकुल फुरसत नहीं है। कल जरा ससुराल जा रहा हूं। सामान – आमान ठीक कर रहा हूं। मैकू – तो आज ही से क्या तैयारी करने लगे ? चार कदम तो है। शायद पहली ही बार जा रहे हो ? अमर…

Read More

नशा (प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ) – Class 12 ईश्वरी एक बड़े जमींदार का लड़का था और मैं एक गरीब क्लर्क का, जिसके पास मेहनत-मजूरी के सिवा और कोई जायदाद न भी। हम दोनों में परस्पर बहसें होती रहती थीं। मैं जमींदारों की बुराई करता, उन्हें हिंसक पशु और खून चूसने वाली जोंक और वृक्षों की चोटी पर फूलने वाला बंझा कहता। वह जमींदारों का पक्ष लेता; पर स्वभावतः उसका पहलू कुछ कमजोर होता था, क्योंकि उसके पास जमींदारों के अनुकूल कोई दलील न थी। यह कहना कि सभी मनुष्य बराबर नहीं होते, छोटे-बड़े हमेशा होते रहते हैं और होते…

Read More

कहानी :- बूढ़ी काकी बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है। बूढ़ी काकी में जिह्वास्वाद के सिवा और कोई चेष्टा शेष न थी और न अपने कष्टों की ओर आकर्षित करने का, रोने के अतिरिक्त कोई दूसरा सहारा ही। समस्त इन्द्रियाँ नेत्र, हाथ और पैर जवाब दे चुके थे! पृथ्वी पर पड़ी रहती और घर वाले कोई बात उनकी इच्छा के प्रतिकूल करते, भोजन का समय टल जाता या उसका परिणाम पूर्ण न होता, अथवा बाजार से कोई वस्तु आती और न मिलती तो ये रोने लगती थीं। उनका रोना-सिसकना साधारण रोना न था, वे गला फाड़-फाड़ कर रोती…

Read More