लोकोक्तियाँ
⇒ लोकोक्ति दो शब्दों – लोक + उक्ति से मिलकर बना है जिसका आशय है- लोक की उक्ति था कथन । ऐसी उक्ति जो किसी क्षेत्र विशेष में, किसी विशेष प्रसँग में, किसी विशेष अर्थ की ओर संकेत करके उद्धृत किया जाता है, वह लोकोक्ति कहलाता है। उदाहरण के तौर पर जंगल में मोर नाचना किसने देखा (गुण की कद्र गुनवानों के बीच होती है), ‘नाच न जाने आँगन टेढ़ा (काम न आने पर कौशल न होने पर बहाना बनाना), न नौ मनं तेल होगा, न राधा नाचेगी (शर्त पूरी न होने पर, काम का न होना), बिन मांगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख (मांगने से कुछ नहीं मिलता) आदि लोक प्रचलित लोकोक्तियों है।
धीरेन्द्र वर्मा – “लोकोक्तियां ग्रामीण जनता की नीति शास्त्र है। यह मानवीय ज्ञान के घनीभूत रत्न है।”
विस्तृत अर्थ में लोक की प्रत्येक उक्ति चाहे वह गीत के रूप में हो, कहावत हो, पहेली हो वह सभी लोकोक्ति: है। लोकोक्तियाँ अद्भुत ज्ञान की रत्नाकर है। लोकोक्तियों’ के माध्यम से जन समुदाय की विचारधार, मानसिक्ता, ज्ञान और संस्कृति का सुगमता से पता लगाया जा सकता है।
लोकोक्तियों के स्वरूप और विशेषताएँ :-
1. लोकोक्ति ‘गागर में’ सागर’ भरने की प्रवृत्ति से काम आता है।
2. यह ग्रामीण जनता का नीतिशास्त्र है।
3. यह मानव ज्ञान के घनीभूत रत्न है, जिनसे बुद्धि और अनुभव की किरणें फूटने वाली ज्योति प्राप्त होती है
4. लोकोक्तियों में प्राप्त सांसारिक व्यवहार पटुता और सामान्य बुद्धि अत्यंत दुर्लभ है।
5. लोकोक्तियाँ जीवन के सत्य, नैतिक आयाम, सुख-दुख, समस्याओं को सरलता से अभिव्यक्त करता है।
लोकोक्तियों के अन्तर्गत कहावते, पहेलियाँ, सुक्तियाँ आदि सम्मिलित है। कहावतें लोकोक्तियाँ हो सकती है किंतु सभी लोकोक्तियां कहावत नहीं । लोकोक्ति और कहावत में मौलिक अंतर है।
मुहावरे:-
1. मुहावरे वाक्यांश होते हैं पूर्ण वाक्य नहीं।
उदाहरण – अपना उल्लू सीधा करना, कलम तोड़ना।
2. इनका स्वतंत्र प्रयोग न होकर वाक्य में प्रयोग होता है।
3. कहावतों में लिंग, वचन, क्रिया के अनुसार, परिवर्तन हो जाता है।
4. मुहावरो का अंत प्राय: ‘ना’ युक्त क्रिया के साथ होता है।
उदाहरण – हाथ फैलाना, गले पड़ना, हवा हो जाना, होश उड़ जाना
5. कहावते प्रायः तर्कपूर्ण नहीं होते। इनका मुख्यार्थ स्वीकार नहीं’ किया जाता है।
उदाहरण – छाती पर मूंग दलना।
लोकोक्तियाँ:-
1. लोकोक्कियाँ पूर्ण वाक्य होते हैं।
उदाहरण:- चार दिन की चांदनी फिर अँधेरी रात।
2. इनका स्वतंत्र प्रयोग संभव है।
3. इनमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता है।
4. लोकोक्तियों में ऐसा कुछ नहीं है।
उदाहरण:- अधजल गगरी, छलकत जाए, अकेली मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है।
5. लोकोक्तियाँ प्रायः तर्कपूर्ण होती है। कुछ लोकोक्तियां भी तर्कशून्य हो सकती है।
उदाहरण:- एक हाथ से ताली नहीं बजती, चिराग तले अँधेरा।
लोकोक्तियों की विशेषता:
1. लोकोक्तियाँ समाज को धर्म और नैतिकता की राह दिखाती है। -” एक और एक ग्यारह होते हैं। “(एकता)
2. लोकोक्तियाँ समाज के प्रत्येक स्तर पर प्रत्येक वर्ग को जोड़ने का काम करती हैं।
3. लोकोक्तियों के माध्यम से किसी जटिल बात को भी सरलता से प्रस्तुत किया जा सकता है।
4. लोकोक्तियाँ जीवनानुभव पर आधारित होती है।
5. लोकोक्तियाँ सर्वव्यापी और सर्वग्रासी होती है।
6. इनका प्रयोग नैतिक मूल्यों के सीख के साथ हास्य और मनोरंजन में भी होता है।
7. लोकोक्तियाँ जीवन के हर पहलू को स्पर्श करती है।
8. लोकोक्तियों में कम शब्दों में व्यापक अर्थ सारगर्भित होते है। ये गागर में सागर भरने की उक्ति को चरितार्क करती हैं।
9. लोकोक्तियों का प्रयोग प्राचीन परम्परा से चला आ रहा है।
10. लोकोक्तियों में प्रायः लयात्मकता होती है।
जैसे – अंधेर नगरी, चौपट राजा। टका सेर भांजी, टका सेर खांजा।
लोकोक्तियों में प्रायः तुकबंदी भी देखने को मिलती जैसे:-
‘गाय न बाछी, नींद आवे आछी।”
‘ऊँची दुकान, फीका पकवान।”
* एक अनार, सौ बीमार ।”
– गरीब की लुगाई, सबकी भौजाई।”
“अंधे के आगे रोवे, अपना दीदा खोवे।”
-“डोली न काहार, बिल्ली हुई है तैयार।”
“ठेस लगे बुद्धि बढ़े।”
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