Author: Puja Gupta

भेड़ और भेड़िये लेखक परिचय:- हिन्दी साहित्य में हास्य-व्यंग्य विधा को नया रूप और नया आयाम देने वाले हरिशंकर परसाई जी का जन्म 22 अगस्त 1924 ई० को मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के जमानी गांव में हुआ था। गाँव से प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे नागपुर चले आये थे। मात्र अठारह वर्ष की उम्र में हरिशंकर परसाई ने ‘जंगल विभाग’ में नौकरी की। पिता की बीमारी के कारण परिवार की आजीविका के लिए इन्हें नौकरी करनी पड़ी। नागपुर विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. करने के बाद उन्होंने अनेक स्थानों पर अध्यापन कार्य किया। बाद में इन्होंने नौकरी छोड़कर…

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घमण्ड का पुतला लेखक परिचय:- मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई १८८०, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।उनका असली नाम गणपत राय श्रीवास्तव है। उनको उपन्यास ‘सम्राट’ तथा ‘कलम का समर्थक कहा जाता था। उन्होंने अपने काव्यों (गोदान, गबन, ईदगाह, सेवासदन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि, कफन, आदि) द्वारा समाज में बहुत से शोषित वर्ग के लिए आवाज उठाई। उपन्यासों के साथ साथ उन्होंने पत्रिकाओं के संपादन का काम भी किया। उनकी भाषा सरल, सहज, व्यावहारिक और प्रभावमयी है, जिसमें आम बोल चल के साथ उर्दू, फारसी और देशज शब्दों का मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी मृत्यु 8 अक्टुबर,…

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कविता :- पुष्प की अभिलाषा कवि परिचय :- पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की  ख्याति एक लेखक, कवि, और वरिष्ठ साहित्यकार के रूप में हैं लेकिन वो एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे। माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल 1889 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के बवाई गाँव में हुआ था। माखनलाल चतुर्वेदी के जन्म के समय भारत पर अंग्रेजों का शासन था एवं तब स्वाधीनता के लिए संघर्ष चल रहा था। माखनलाल जब 16 वर्ष के हुए तब ही स्कूल में अध्यापक बन गए थे। उन्होंने कुछ समय तक एक विध्यालय में अध्यापन का कार्य किया। लेकिन जल्द ही माखनलाल ने…

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बिनु गुपाल बैरिनि भई कुंजैं ( पद ) जीवन परिचय :- सूरदास जी कृष्णभक्ति काव्य धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि थे। इनका जन्म सम्वत् 1540 (1483 ई०) में सीही नामक ग्राम में हुआ। कुछ विद्वान सूरदास का जन्म स्थान रूनकता मानते है। स्वामी वल्लभाचार्य जी सूरदास के गुरु थे। सूरदास वात्सल्य व श्रृंगार के अन्यतम कवि हैं। सूरदास की भक्ति के विविध रूप हैं। सख्यभाव की भक्ति, वात्सल्यभाव की भक्ति उनके भक्ति के प्रमुख रूप हैं। इन्हीं भक्ति को आधार बनाकर सूर ने अपनी बंद आँखों से वो सबको देख लिया, जो लोग खुली आँखों से भी नहीं देख पाते। आचार्य…

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आत्माराम लेखक परिचय:- मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई १८८०, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।उनका असली नाम गणपत राय श्रीवास्तव है। उनको उपन्यास ‘सम्राट’ तथा ‘कलम का समर्थक कहा जाता था। उन्होंने अपने काव्यों (गोदान, गबन, ईदगाह, सेवासदन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि, कफन, आदि) द्वारा समाज में बहुत से शोषित वर्ग के लिए आवाज उठाई। उपन्यासों के साथ साथ उन्होंने पत्रिकाओं के संपादन का काम भी किया। उनकी भाषा सरल, सहज, व्यावहारिक और प्रभावमयी है, जिसमें आम बोल चल के साथ उर्दू, फारसी और देशज शब्दों का मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी मृत्यु 8 अक्टुबर, 1936 को…

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रंगीले बाबू लेखक परिचय:- मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई १८८०, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।उनका असली नाम गणपत राय श्रीवास्तव है। उनको उपन्यास ‘सम्राट’ तथा ‘कलम का समर्थक कहा जाता था। उन्होंने अपने काव्यों (गोदान, गबन, ईदगाह, सेवासदन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि, कफन, आदि) द्वारा समाज में बहुत से शोषित वर्ग के लिए आवाज उठाई। उपन्यासों के साथ साथ उन्होंने पत्रिकाओं के संपादन का काम भी किया। उनकी भाषा सरल, सहज, व्यावहारिक और प्रभावमयी है, जिसमें आम बोल चल के साथ उर्दू, फारसी और देशज शब्दों का मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी मृत्यु 8 अक्टुबर, 1936…

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रानी सारंधा लेखक परिचय:- मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई १८८०, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।उनका असली नाम गणपत राय श्रीवास्तव है। उनको उपन्यास ‘सम्राट’ तथा ‘कलम का समर्थक कहा जाता था। उन्होंने अपने काव्यों (गोदान, गबन, ईदगाह, सेवासदन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि, कफन, आदि) द्वारा समाज में बहुत से शोषित वर्ग के लिए आवाज उठाई। उपन्यासों के साथ साथ उन्होंने पत्रिकाओं के संपादन का काम भी किया। उनकी भाषा सरल, सहज, व्यावहारिक और प्रभावमयी है, जिसमें आम बोल चल के साथ उर्दू, फारसी और देशज शब्दों का मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी मृत्यु 8 अक्टुबर, 1936…

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बड़े भाई साहब CLASS 10 (प्रेमचंद की कहानी) लेखक परिचय:- मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई १८८०, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।उनका असली नाम गणपत राय श्रीवास्तव है। उनको उपन्यास ‘सम्राट’ तथा ‘कलम का समर्थक कहा जाता था। उन्होंने अपने काव्यों (गोदान, गबन, ईदगाह, सेवासदन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि, कफन, आदि) द्वारा समाज में बहुत से शोषित वर्ग के लिए आवाज उठाई। उपन्यासों के साथ साथ उन्होंने पत्रिकाओं के संपादन का काम भी किया। उनकी भाषा सरल, सहज, व्यावहारिक और प्रभावमयी है, जिसमें आम बोल चल के साथ उर्दू, फारसी और देशज शब्दों का मिश्रण देखने को मिलता…

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लेखक परिचय :- प्रेमचंद (31 जुलाई, 1880-8 अक्टूबर, 1936) हिंदी के उन महानतम लेखकों में से एक जिनके बिना हिंदी साहित्य का जगत सूना है। इनका मूल नाम ‘धनपत राय श्रीवास्तव’ था, किंतु ये ‘नवाब राय’ और ‘प्रेमचंद’ के नाम से अधिक जाने जाते हैं। हिंदी साहित्य में इन्हें ‘उपन्यास सम्राट’ की पदवी प्राप्त थी। आप एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी संपादक थे। रामलीला इधर एक मुद्दत से रामलीला देखने नहीं गया। बंदरों के भद्दे चेहरे लगाये, आधी टांगों का पाजामा और काले रंग का ऊंचा कुरता पहने आदमियों को दौड़ते, हू – हू करते देख…

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बड़े घर की बेटी बेनीमाधव सिंह गौरीपुर गांव के जमींदार और नम्बरदार थे। उनके पितामह किसी समय बड़े धन-धान्य संपन्न थे। गांव का पक्का तालाब और मंदिर जिनकी अब मरम्मत भी मुश्किल थी, उन्हीं के कीर्ति – स्तंभ थे। कहते हैं, इस दरवाजे पर हाथी झूमता था, अब उसकी जगह एक बूढ़ी भैंस थी, जिसके शरीर में अस्थि – पंजर के सिवा और कुछ न रहा था; पर दूध शायद बहुत देती थी; क्योंकि एक न एक आदमी हांड़ी लिये उसके सिर पर सवार ही रहता था। बेनीमाधव सिंह अपनी आधी से अधिक संपत्ति वकीलों को भेंट कर चुके थे।…

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